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भारत का राज्य क्षेत्र

अनुच्छेद 1 :-इंडिया जो कि भारत है" राज्यो का संघ " होगा अर्थात भारत संघ कोइ समझौते का परिणाम नही है ।(union of the states) यह union शब्द से तात्पर्य भारत एक अविनाशी संघ है कोई भी इकाई भारत से अलग नही हो सकती ।   इससे दो बाते स्पष्ट होती है देश का नाम और राज्य की प्रकृति संघीय है । इस अनुच्छेद के अनुसार भारत के राज्य क्षेत्र में सभी राज्य, संघ शासित प्रदेश तथा भारत द्वारा अर्जित किये जाने वाले प्रदेश शामिल है। (28राज्य व 9 केंद शासित प्रदेश जिसकी सूची अनुसूचि 1 में है।)

अनुच्छेद 2:- इसमे भारत के किसी बाहरी प्रदेश को भारत के राज्य क्षेत्र में शामिल किए जाने की प्रक्रिया का उल्लेख है। संसद विधि बनाकर ऐसे कानून का निर्माण कर सकती है।

अनुच्छेद 3:-इसमें भारत के राज्य क्षेत्र में किसी नये राज्य का गठन करना( जैसे एक राज्य को 2 भागो में बाटना या दो राज्यो को मिला कर एक नया राज्य बनाना इत्यादि) ) , किसी राज्य की सीमा में परिवर्तन करना( घटना या बढ़ाना) अथवा किसी राज्य के नाम मे परिवर्तन करना व राज्य में विधान परिषद को बनाने या हटाने आदि का उल्लेख है। 
इसकी शक्ति संसद के पास है । ऐसे किसी विधेयक को संसद में लाने से पहले राष्ट्रपति द्वारा सम्बन्धित राज्य विधानमंडल के विचार भी जाने जाते है। विचार जानने की अवधि तथा विचार को मानना या न मानना यह राष्ट्रपति पर निर्भर है।

अनुच्छेद 4:- इसके तहत अनुच्छेद 2 व अनुच्छेद 3 के अंतर्गत किये गए सभी संसोधनो अनुच्छेद 368 की प्रक्रिया के अंतर्गत नही गिने जाएंगे।

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