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राजस्थान के प्रमुख मन्दिर भाग 3

(1) सूर्य मंदिर :- झालावाड़ झालरापाटन। इसे सात सहेलियों के मंदिर भी कहते है। जेम्स टॉड ने इसे चारभुजा मन्दिर भी कहा। इसको पद्मनाभ मन्दिर भी कहते है।

(2) चौमुखा जैन मंदिर :- पाली देसूरी रणकपुर। कुम्भा के समय 1439 ई में धरणक शाह द्वारा निर्मित श्वेताम्बर जैन मंदिर। माद्री पर्वत की छाया में बना। भगवान आदिनाथ को समर्पित नलिनी गुल्म देव विमान आकर में निर्मित पूरा मन्दिर 1444 स्तम्भों पर खड़ा इस कारण स्तम्भों का वन भी कहते हैं और सभी अलग अलग डिजाइन के । इसकी विशेषता है कि किसी भी कोण से देखने पर भगवान के दर्शन में कोई स्तम्भ आड़े नही आता। आदिनाथ की प्रतिमा 5 फुट की और चारो प्रतिमा चारो दिशा में स्थापित ,इस कारण इसको चतुर्मुख जिन प्रासाद कहते है । यहाँ वेश्याओं का मंदिर भी जिसमें नेमिनाथ जी की मूर्ति विद्यमान है।

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(3) गौतमेश्वर :- पाली जिले में सुकड़ी नदी के किनारे । मीणा जनजाति के लोग इनको अपना इष्टदेव मानते है और इनको भूरिया बाबा कहते है और अपने पूर्वजों की अस्थियां सुकड़ी नदी में बहाते है।

(4) मुछाला महावीर :- पाली के कुम्भलगढ़ अभ्यारण्य में घाणेराव के पास। इस मंदिर में मूछों वाले महावीर स्वामी की मूर्ति है।

(5) नारलाई :- पाली । इसमे गिरनार तीर्थ बहुत प्रसिद्ध है इसमे नेमिनाथ जी की श्यामवर्णी मूर्ति है। पास में सहसवान तीर्थ जहां नेमी राजुल के पद चिन्ह है।

(6) वरकाणा :- पाली । पार्श्वनाथ जी का मंदिर ।

(7) राता महावीर का जैन मंदिर :- पाली। इसकी तुलना रणकपुर के मंदिर से की जाती है।

(8) सांडेराव का शांतिनाथ मन्दिर :- पाली। 1400 साल पुराना। निर्माण पांडवों के वंशधर गन्धर्वसेन ने कराया।

(9) सिरियारी :- पाली। यहाँ जैन श्वेतांबर तेरापंथ के प्रथम आचार्य श्री भिक्षु का निर्वाण हुआ। इस सम्प्रदाय का प्रमुख तीर्थ है।

(10) मीरा मन्दिर :- चित्तौड़गढ़। इंडो आर्य शैली में निर्मित।

(11) श्रंगार चंवरी :- चित्तौड़गढ़। शान्त नाथ जैन मंदिर जिसे कुम्भा के कोषाधिपति वेलक़ा ने बनवाया

(12) सतबिस देवरी :- चित्तौड़गढ़। जैन मंदिर। 27 मन्दिर साथ होने के कारण सतबिस देवरी कहलाता है।

(13) ददरेवा :- चूरू। गोगाजी का जन्म स्थल । इनको यहाँ राखी चढ़ाई जाती है। भाद्रपद कृष्ण नवमी को मेला।

(14) सालासर बालाजी :- चूरू। संस्थापक श्री मोहनदास जी
इसके पूर्व में 1 किमी दूर हनुमान जी का जननी अंजना देवी के साथ मन्दिर जिसमे हनुमानजी दाढ़ी मुंछ के साथ।

(15) तिरुपति बालाजी सुजानगढ़ :- चूरू। वेंकटेश्वर तिरुपति बालाजी का मंदिर। 75 फिट ऊंचा।

(16) महेंदी पूरा बालाजी :- दौसा में सिकन्दरा से महुवा के बीच। दो पहाड़ियों की घाटी में स्थित होने के कारण घाटा मेंहदीपुरा भी कहते है। मूर्ति पर्वत का ही एक अंग है।

(17) हर्षत माता का मंदिर :- आभानेरी दौसा। वैष्णव संप्रदाय का मंदिर ।

(18) झांझीराम पूरा :- दौसा। झाझेश्वर महादेव का मंदिर । एक ही जलहरी में 121 महादेव हैं। यहाँ के गोमुख से सर्दियों में गर्म और गर्मियों में ठंडा पानी बहता है।

(19) सैपऊ महादेव :- धौलपुर। यहाँ गंगा जी से पैदल चल कर पानी की कावड़े कंधो पर लाकर चढ़ाया जाता है।

(20) मचकुण्ड :- धौलपुर में गन्धमादन पर्वत पर स्थित । इसको तीर्थो का भांजा भी कहा जाता है। इसमे स्नान से चर्म रोग दूर होते है। यहाँ गुरु गोविंद सिंह ठहरे थे। अपनी तलवार से शेर का शिकार किया अतः यहाँ पर शेर शिकार गुरुद्वारा बना हुआ है।

(21) देव सोमनाथ :- डूंगरपुर । प्राचीन शिव मंदिर जो सोम नदी के किनारे है । वास्तुकला की दृष्टि से व ऐतिहासिक दृष्टि से वागड़ का सांस्कृतिक वैभव। मन्दिर का निर्माण बिना चुने सीमेंट के ।

(22) बेणेश्वर :- डूंगरपुर। सोम , माही ओर जाखम के संगम पर स्थित , वनवासियों का महातीर्थ। महारावल आसकरण ने बनवाया। यह मृतात्माओं का मुक्तिस्थल। मेला माघ शुक्ला एकादशी को पीठाधीश्वर गोस्वामी अच्युतानन्द महाराज द्वारा बेणेश्वरधाम के प्रधान देवालय हरि मन्दिर पर सात रंग की ध्वजा चढ़ा कर।

(23) विजय राज मन्दिर :- गेबसागर डूंगरपुर। चतुर्भुजाकार भव्य मंदिर ।

(24) गवरी बाई का मंदिर :- डूंगरपुर के महारावल शिवसिंह ने बनाया।

(25) सन्त माव जी का मंदिर :- साबला गांव डूंगरपुर। ये विष्णु का कल्कि अवतार माने जाते है।

(26) ऋषभ देव मन्दिर :- उदयपुर में कोयल नदी पर धुलेव कस्बे में। यह किसी सम्प्रदाय या जाति विशेष के लोग नही अपितु सभी लोगो के आराध्य। इनको केसर चढ़ाई जाती है अतः इनको केसरिया नाथ के नाम से स्मरण किया जाता है। इनकी काले पत्थर की बड़ी मूर्ति है जिसको काला जी और काला बाव जी कहते हैं। भील लोग कालिया बाबा की आण लेते हैं और इनकी शपथ लेने के बाद झूठ नही बोलते । वैष्णव धर्म इनको विष्णु का अवतार मानता है। अश्विन कृष्ण प्रतिपदा ओर द्वितीया को रथयात्रा और चैत्र कृष्ण अष्टमी और नवमी को मेला।

(27) रावण मन्दिर :- मण्डोर जोधपुर। श्री माली ब्राह्मण पूजा करते है।

(28) नाचणा गणेश मंदिर :- रणथम्भौर।

(29) बाजणा गणेश जी :- सिरोही।

(30) खड़े गणेश मंदिर :- कोटा। 

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