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राजस्थान के लोक देवता भाग 2

(1) तेजा जी :- जन्म - खड़नाल नागौर के नागवंशीय जाट परिवार में ताहड जी के घर माता रामकुंवरी के यहाँ विक्रम संवत 1130 की माघ शुक्ला चतुर्दशी को।
 पत्नी पेमलदे ।
मृत्यु - लाछा गुजरी की गायों को मेरो से छुड़ाते समय । निर्वाण स्थान सुरसुरा अजमेर में है।
इनकी  घोड़ी लीलण ( सिणगारी )। इनके भोपे ' घोड़ला ' कहलाते है ।
थान पर सर्प ओर कुते काटे लोगो का इलाज व किसानों द्वारा अच्छी फसल हेतु इनके गीत गाये जाते है। इनको धौलिया वीर ओर काला और बाला के देवता भी कहते है।
मुख्य थान अजमेर में सुरसुरा , ब्यावर, सेदरिया और भावन्ता में है।
मेला भाद्रपद शुक्ला दशमी को नागौर के परबतसर गांव में जो पशु खरीद के लिए विख्यात ।

(2)देवनारायण जी :- जन्म आसींद भीलवाड़ा में विक्रम सवंत 1300 में बगड़ावत परिवार में सवाईभोज ओर सेढु के घर । जन्म नाम उदयसिंह ।इनकी पत्नी धार नरेश की पुत्री पीपल दे ।
गुर्जर जाति के लोग विष्णु का अवतार कहते है। इनकी फड़ गुर्जर भोपो द्वारा जंतर वाद्य के साथ बाँची जाती है।
इनके घोड़े का नाम लीलागर था।
इनके देवरे में प्रतिमा के स्थान पर बड़ी ईंट की पूजा की जाती है इस कारण इनको ईटो का श्याम भी कहते है। इनका मूल देवरा आसींद भीलवाड़ा से थोड़ा दूर गोठा दड़ावत में है। अन्य स्थान देवमाली ब्यावर अजमेर, देवधाम जोधपुरिया निवाई टोंक और देव डूंगरी पहाड़ी चित्तोड़ में है।
मेला भाद्रपद शुक्ला छठ व सप्तमी को ।
इन्होंने देह त्याग देवमाली ब्यावर में किया जिसे बगड़ावतों का गांव कहते है।
देवनारायण जी प्रथम लोक देवता है जिन पर 2011 में केंद्रीय संचार मंत्रालय द्वारा डाक टिकट जारी किया ।

(3)कल्ला जी :- जन्म विक्रम संवत 1691 में आश्विन शुक्ला अष्टमी को मारवाड़ के सामियाना गांव में राव अचलजी के घर हुआ । मीरा जी इनकी भुआ थी । गुरु भैरवनाथ जी ।
 चितौड़ के तीसरे शाके में अकबर के विरुद्ध लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त।
इनको चार हाथ वाले देवता तथा शेषनाग का अवतार कहे जाते है।
चितौड़ दुर्ग की भैरव पोल पर इनकी छतरी तथा रनेला में सिद्ध पीठ है ।

(4) मल्लीनाथ जी :- जन्म सन 1358 को मारवाड़ के राव तीडा जी के यहाँ ,माता जाणी दे ।
मंदिर तिलवाड़ा बाड़मेर में जहाँ चैत्र कृष्ण एकादश को पशु मेला लगता है ।
पत्नी रूपादे का मंदिर मालाजाल गांव में ।
भविष्य द्रष्टा और चमत्कारी पुरुष जिन्होने लोगो की विदेशी आक्रांताओं से रक्षा की।
बाड़मेर का मालानी क्षेत्र इन्ही के नाम पर है।


(5) देवबाबा:-  तीर्थ स्थान नंगलाजहाज भरतपुर । गुर्जर व ग्वालो के पालन हार । आयुर्वेद के ज्ञाता । भाद्रपद शुक्ला पंचमी व चैत्र शुक्ला पंचमी को मेला ।

(6) केसरिया कुंवर जी :- गोगा जी के पुत्र । भोपे सर्पदंश के रोगी का जहर मुँह से चूसते है। थान पर सफेद रंग की ध्वजा ।

(7) आलम जी :- जेतम लोत के राठौड़ । मालानी बाड़मेर में लूनी के किनारे राड धरा के लोकदेवता । ढंगी नामक टिले पर थान जो आलम जी के धोरे के नाम से जाना जाता है। मेला भाद्रपद की शुक्ल द्वतिया को ।

(8)तल्ली नाथ जी राठौड़:-  जन्म पंचोटी जालोर में । पिता वीरमदेव ,गुरु जालन्धर नाथ । बीमार व जहरीले कीड़े के काटने पर इनके नाम का डोरा पहनते है । इन्होंने प्रकति सरंक्षण पर बल दिया।

(9) वीर बग्गाजी जाट :- जन्म बीकानेर का रिड़ी गांव । जाखड़ समाज के कुल देवता । मुस्लिम लुटेरों से गो रक्षा हेतु प्राण दिए ।

(10) वीर फत्ता जी :- जन्म सानथु गांव जालौर । मेला भाद्रपद शुक्ला नवमी । भूमि की रक्षा हेतु प्राण दिए ।

(11) बाबा झुंझार जी :- जन्म इमलोह सीकर । मुस्लिम लुटेरों से गांव की रक्षा हेतु प्राण दिए। स्थल खेजड़ी पेड़ के नीचे । मेला रामनवमी को ।

(12)भोमिया जी :- भूमि रक्षक देवता ।

(13)भूरिया बाबा ( गौतमेश्वर) :- जन्म प्रतापगढ़ सिरोही । मीणा जाति के इष्टदेव । मंदिर अरावली श्रंखला में । प्रभाव गोडवाड़ क्षेत्र में ।

(14) वीर पनराज जी :- जन्म नगा गांव जैसलमेर । मुस्लिम लुटेरों से गायो की रक्षा हेतु प्राण न्योछावर ।

(15) हरिराम बाबा :- जन्म झोरड़ा गांव चुरु । पिता रामनारायण तथा माता चन्दणी देवी । मंदिर में मूर्ति के जगह सांप की बांबी ओर बाबा के प्रतीक के रूप में चरण कमल । सर्पदंश के लिए प्रसिद्ध ।

(16) मामा देव :- विशिष्ट लोक देवता जिनकी मूर्ति नही होती बल्कि लकड़ी का कलात्मक तोरण होता है जिसे गांव के बाहर मुख्य सड़क पर लगाया जाता है । बरसात के देवता कहलाते है। प्रसन्न करने हेतु भैसे की बलि ।

(17) रुपनाथ जी :- पाबु जी के भतीजे । जन्म कोलूमण्ड फलोदी जोधपुर । जिन्दावर खिंची की हत्या की । प्रमुख स्थान सिमभुदडा नोखमण्डी बीकानेर व हिमाचल में बालक नाथ के नाम से पूजे जाते है।

(18) डुग जी जवाहर जी :- जन्म सीकर । 1857 की क्रांति में महत्वपूर्ण योगदान।

(19) इलोजी :- इनको छेड़छाड़ के देवता के रूप में जाना जाता है।

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