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राजस्थान की हस्तकलाएँ भाग 2


(1) कपड़ो की छपाई का काम :- छपाई कार्य करने वाले छिपे कहलाते है और सांगानेर के छिपे नामदेवजी छिपे कहलाते है ।

छपाई के विभिन्न  प्रकार के कार्य होते है :-
a) बाड़मेर की दो प्रकार की जिसमे अलंकरण ज्यामितीक होते है:-
       अरजख प्रिंट :- नीले ओर लाल रंग का प्रयोग अधिक होता है ।
       मलीर प्रिंट :- कत्थई और लाल रंग का अधिक प्रयोग होता है।
b) बगरू प्रिंट :- काले व लाल रंग का प्रयोग ।
c)आजम प्रिंट :- इसमे लाल ,काले और हरे रंग का अधिक प्रयोग । यह अकोला चित्तौड़गढ़ की प्रसिद्ध । इसकी छपाई के घाघरे बहुत प्रसिद्ध है ।
d) सांगानेर की सांगानेरी प्रिंट

(2) गलीचे :- जयपुर इसके लिए प्रसिद्ध । अन्य स्थानों में टोंक,  ब्यावर , किशनगढ़ ,मालपुरा , भीलवाड़ा आदि ।

(3) दरियाँ :- नागौर के टांकला गांव की प्रसिद्ध । सूत की दरियाँ जोधपुर ,टोंक , नागौर, बाड़मेर , इत्यादि की प्रसिद्ध ।

(4)नमदे :- ऊन को कूट कूट कर उसे जमा कर जो वस्त्र बनाने जाते है उसे नमदे कहते है। टोंक के ऊनी नमदे प्रसिद्ध है।

(5) चटापटी का काम :- कपड़े को काट कर दूसरे कपड़े पर सील देना ।

(6)जरी गोटे का काम :- जरी का काम सूरत से जयपुर राजा सवाई जय सिंह के समय लाया गया और गोटा खण्डेला ,जयपुर, भिनाय और अजमेर का प्रसिद्ध है ।

(7) पैच वर्क :- विभिन्न रंगों के कपड़ो के टुकड़ों को काटकर कपड़ों पर विभिन्न प्रकार की डिजाइन में सीलना । यह मुख्यतः शेखावाटी का प्रसिद्ध है ।

(8) बन्धेज का काम :- विभिन्न प्रकार के वस्त्र पर डोरे से विभिन्न प्रकार के चित्रों और आकृतियों की चुन्नटें बांध कर इच्छित रंगों से रंगना । यह जयपुर जोधपुर बीकानेर शेखावाटी का प्रसिद्ध है ।
जयपुर का लहरिया और पोमचा प्रसिद्ध है ।
पोमचा प्रसूता स्त्री को पुत्र जन्म पर पहनाया जाता है यह मुख्य रूप से पीले रंग का और इसमे चारों और किनारे पर लाल रंग होता है
लहरिया श्रावण में पहनी जाने वाली ओढ़नी जिससे विभिन्न रंगों की एक ओर आड़ी धारियां होती है।

(9) कढ़ाई ओर कशीदाकारी :- कपड़ो पर बिभिन्न रंग के धागों से कढ़ाई का काम जो सीकर , झुंझुनूं और उसके आस पास के क्षेत्र में होता है ।

(10) मुकेश का काम :- कपड़े पर बादले से छोटी छोटी बिंदकी का काम ।

(11) पेपर मैसी ओर कुट्टी का काम :- कागच की लुगदी से विभिन्न प्रकार की वस्तुओं का निर्माण करना जो मुख्य रूप से जयपुर ओर उदयपुर का प्रसिद्ध है ।

(12)  हाथी दांत और चंदन पर खुदाई का काम:- इसमे कलात्मक वस्तुएं ,खिलौने और देवी देवताओं की मूर्तियों का निर्माण किया जाता है जो मुख्य रूप से जयपुर के प्रसिद्ध है ।

(13) उस्ता कला और मुनव्वती का काम :- ऊंट की खाल के कूपे बनाकर उस पर सोने और चांदी का कलात्मक चित्रण व नक्काशी का काम । बीकानेर का उस्ता परिवार इस हेतु प्रसिद्ध  ।

(14) बादला :- जिंक से निर्मित पानी की बोतल । इसमें लंबे समय तक पानी ठंडा रहता है क्योंकि चारों और कलात्मक कपड़े का आवरण चढ़ा दिया जाता है ।जोधपुर के सर्वाधिक प्रसिद्ध ।

(15) तहनिशा :- इस काम मे डिजाइन को गहरा खोद दिया जाता है फिर उसमें पतला तार भरा जाता है। उदयपुर के सिगलीगर और अलवर के तलवार साज यह काम अच्छे तरह से करते है ।

(16) मुरादाबादी काम :- पीतल के बर्तन पर खुदाई करके उस पर कलात्मक नक्काशी करने का कार्य । मुख्यतः जयपुर ओर अलवर का प्रसिद्ध ।

(17) चमड़े का काम :- जूतियां ओर मोझड़िया जोधपुर की प्रसिद्ध ।

(18) चांदी की कलात्मक वस्तुए :- बीकानेर की चांदी की अफीमदान , सिगरेट केस , किवाड़ जोड़ियां , डिब्बियां , इत्यादि ।उदयपुर के सिगलीगरो द्वारा चांदी के पशु पक्षि , शस्त्र , खिलोने इत्यादि ।

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