Recent Posts

राजस्थान के प्रमुख मन्दिर भाग 1

1) पुष्कर :- कोकण तीर्थ , आदि तीर्थ और तीर्थ राज भी कहा जाता है। ब्रह्म जी का भव्य मंदिर। पुष्कर झील , इस पर 52 घाट। कार्तिक मास में एकादशी से पूर्णिमा तक मेला भरता है।
     झील के तट पर मानसिंह द्वारा निर्मित मानमहल।
     पास में पंचकुंड यहाँ पांडव अज्ञात वास हेतु रहे।
     संतोष बावला को छतरी।

2) सावित्री मन्दिर :- पुष्कर के दक्षिण में रत्नगिरि पर्वत पर।

3) गायत्री मन्दिर :- पुष्कर के उत्तर में ।

4) काचरिया मन्दिर :- अजमेर। राधा कृष्ण मंदिर। मन्दिर में सेवा निम्बार्क पद्धति से । श्री कृष्ण का अष्ट धातु से निर्मित घनश्याम वर्ण का विग्रह विद्यमान। यहाँ का डोलोत्सव प्रसिद्ध,  जो होली के दूसरे दिन मनाया जाता है।

5) लाल मन्दिर / सोनी जी की नसिया :-अजमेर। 1864 में सेठ मूल चंद जी सोनी ने इसका निर्माण करवाया । जैन सम्प्रदाय का प्रसिद्ध तीर्थ है। आदिनाथ भगवान की मूर्ति समवशरण की रचना है।

(6) घोटिया अम्बा :- बांसवाड़ा। अम्बा माता का मंदिर। घोटेश्वर महादेव, पांडव कुंड , केलपनी आदि अन्य पवित्र तीर्थ है। यहाँ जिले का सबसे बड़ा मेला चैत्र अमावस्या को।

(7) धूणी के रणछोड़ राय जी :- बांसवाड़ा से उदयपुर के मार्ग पर । महाभारत युगीन तीर्थ। फाल्गुन शुक्ला एकादशी को मेला। 

(8)  कालिंजर :- बांसवाड़ा। हिरन नदी के किनारे। ऋषभदेव की मूर्ति।

(9) छिंछ मन्दिर :- बांसवाड़ा। 12वी सदी का ब्रह्मा जी का मंदिर । अंबलिया तलाब के किनारे छिंछ देवी की प्रतिमा।

(10) अर्थुणा के मंदिर :- बांसवाड़ा । वागड़ के परमार राजाओ द्वारा निर्मित। प्राचीन नाम उत्थुनक। मुख्य मन्दिर हनुमानजी का मंदिर। इसे वागड़ का खुजराहो भी कहते है।

(11) त्रिपुरा सुंदरी :- तलवाड़ा बांसवाड़ा। तुरताई माता भी कहलाती है। इस मूर्ति की पीठिका के मध्य में श्री यंत्र अंकित है। देवी की काले पत्थर की मूर्ति विराजमान है। यहां त्रिपुर से सन्दर्भ तीन पुर शक्ति पुर , विष्णु पुर , शिवपुर से है।

(12) नन्दिनी माता तीर्थ :- बांसवाड़ा। बड़ोदिया कस्बे के निकट। श्वेत पत्थर से निर्मित देवी की अष्ट भुजा प्रतिमा। पौष पूर्णमा को मेला।

(13) भंडदेवरा के शिव मंदिर :- बांरा । हाड़ौती का खुजराहो, राजस्थान का मिनी खुजराहो कहा जाता है। यहाँ भंडदेवरा का अर्थ - टूटा फूटा देवालय। मिथुन मुद्रा में अनेक आकृतियां उत्कीर्ण । देवालय पंचायतन शैली में है। मेदवंशीय राजा मलयवर्मा द्वारा शत्रु पर विजय के उपलक्ष्य में बनवाया गया। त्रिशा वर्मा द्वारा पुनः उद्धार ।

(14) गड़गच्च देवालय :- अटरू बांरा । 10वी शताब्दी का मंदिर।

(15) ककुनी के मंदिर :- बांरा। छीपाबड़ौद तहसील में  मुकुन्दरा की पहाड़ियों में परवन नदी के किनारे।

(16) सीताबाड़ी :- केलवाड़ा बांरा। यहाँ वाल्मिकी, सीता व लक्ष्मण का प्राचीन मंदिर ।

(17) श्री रणछोड़ राय जी का खेड़ मन्दिर :- बाड़मेर। वैष्णव व हिंदुओं का तीर्थ। खेड़ में ये रेबारियों के आराध्य देव है।

(18) मल्लीनाथ जी मन्दिर :- तिलवाड़ा बाड़मेर । चैत्र कृष्ण एकादशी से शुक्ला एकादशी तक मेला।

(19) ब्रह्मा जी का मंदिर :- आसोतरा, बाड़मेर । सिद्ध पुरुष खेताराम जी ने बनवाया। मूर्ति की स्थापना 1984 में।

(20) नाकोड़ा :- बाड़मेर में बालोतरा से आगे भाकरिया पहाड़ी पर जैन धर्म से सम्बंधित तीर्थ । मेवा नगर के नाम से भी प्रचलित। तेइसवें तीर्थंकर पार्श्वनाथ जी की प्रतिमा। भैरव जी भी अधिष्ठापित जिनका मन्दिर 1511ई में आचार्य कीर्ति रत्न सूरी ने बनवाया।। इनको हाथ का हुजूर भी कहते है और जगती जोत माना जाता है।

(21) किराडू के मंदिर :- बाड़मेर के हाथमा गांव के पास। राजस्थान का खुजराहो भी कहते है। अन्य नाम किरात कूप। सर्वप्रसिद्ध मन्दिर सोमेश्वर मन्दिर। स्थापत्य कला भारतीय नागर शैली व महामारू गुर्जर शैली।

(22) हल्देश्वर महादेव मंदिर :- पीपलूद बाड़मेर। छप्पन की पहाड़ियों के बीच यह मारवाड़ का लघु माउण्ट आबू

(23) नारायणी माता :- अलवर में राजगढ़ तहसील में बरवा डूंगरी की तलहटी में । प्रति वर्ष वैशाख शुक्ल एकादशी को मेला।

(24) तिजारा के जैन मंदिर :- जैन तीर्थंकर भगवान चन्दप्रभु का मंदिर। यहाँ देहरा स्थल पर मूर्ति।

(25) नो गांव के जैन मंदिर :- अलवर - दिल्ली मार्ग पर दिगम्बर जैन समाज का प्रमुख केंद्र। यहाँ मल्लीनाथ जी का नोचौकिया मन्दिर अति प्राचीन , निर्माण 803 में। इस मूर्ति कि पीठ पर प्रशस्ति अंकित । यहाँ ऊपर वाला मन्दिर के नाम से जैन तीर्थंकर शांतिनाथ जी का मंदिर।

(26) खलकाणी माता का मंदिर :- लुणीयावास जयपुर। शारदीय नवरात्र मो मेला भरता है जो राजस्थान में गधो का सबसे बड़ा मेला है।

(27) स्वर्ण मंदिर :- पाली । जिसे gateway of golden and mini mumbai के नाम से जाना जाता है।

(28) 33करोड़ देवी देवताओं का मंदिर :- बीकानेर जूनागढ़।

(29) 33 करोड़ देवी देवताओं की साल :- मण्डोर अभयसिंह द्वारा निर्मित।

(30) 72 जिनालय :- भीनमाल जालौर।

Post a Comment

0 Comments