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राजस्थान के त्यौहार भाग 1

1) चैत्र माह :-
  कृष्ण पक्ष - a) प्रतिपदा - धुलण्डी। इस दिन होली की।अवशिष्ट राख की वंदना और रंगों से होली खेली जाती है।
                  b) अष्टमी - शीतला अष्टमी। इस दिन शीतला माता की पूजा और ठंडा भोजन किया जाता है। चाकसू जयपुर में गधो का मेला लगता है।
                  c) अष्टमी और नवमी - ऋषभ देव मेला । इसे धुलेव उदयपुर में मनाया जाता है।
                  d) अष्टमी - घुड़ला त्योहार - राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र मे कृष्ण अष्टमी से शुक्ल तुतीय तक मनाया जाता है । स्त्रीयाँ एक छिद्र युक्त गड़े मर दीपक रख कर उसकी पूजा करती है तथा इसे घरों में घुमाया जाता है व जुलुस निकाले जाते है अंतिम दिन इसका तालाब में विसर्जन कर दिया जाता है।
                  e) एकादशी - जौहर मेला - चित्तौड़गढ़।   
शुक्ल पक्ष :- a) प्रतिपदा - विक्रम संवत की शुरुआत होती है।
बसन्त नवरात्र की शुरुआत। गुदीपर्व का त्योहार मनाया जाता है।
                  b) प्रतिपदा :- अरुंधति व्रत - प्रतिपदा से आरम्भ होकर तृतीय को समाप्त । स्त्रियों के चरित्र उत्थान हेतु महत्व। वैधव्य दोष से मुक्ति हेतु किया जाता है।
                  c) तृतीया - इससे एक दिन पूर्व सिंजारा होता है जिसमे पुत्री व पुत्रवधू हेतु साड़ी, चूड़ी, मेहंदी, रोली इत्यादि श्रंगार के समान भेजे जाते है।
                   गणगौर सुहागनों का महत्वपूर्ण त्योहार जिससे शिव पार्वती की पूजा। इसमें गण महादेव और गौरी पार्वती का प्रतीक। कुँवारी कन्या इच्छित वर प्राप्ति हेतु करती है। जयपुर और उदयपुर में इसकी सवारी निकली जाती है। जैसलमेर में केवल ईसर की सवारी निकली जाती है। सबसे अधिक गीतों का त्योहार।
                 d) अष्टमी - अशोकाष्टमी - अशोक व्रक्ष की पूजा का विधान।
                 e) नवमी - रामनवमी - श्री राम का जन्मदिवस। रामायण का पाठ और सरयू में स्नान किया जाता है । अंतिम नवरात्र मनाया जाता है।
                 f) पूर्णिमा - हनुमान जयंती - सालासर चूरू और मेहंदीपुर दौसा में मेला भरता है।

2) बैशाख माह :-
 कृष्ण पक्ष :- a) तृतीय - धींगा गवर - जोधपुर में इस दिन धींगा गवर का मेला भरता है।
 शुक्ला पक्ष :- a) तृतीया - अक्षय तृतीया/ आखा तीज - किसान सात अन्नो और हल की पूजा करते है व वर्षा की कामना करते है। अबूझ सावा होने के कारण राजस्थान में सर्वाधिक बाल विवाह होते है। शास्त्रानुसार सतयुग और त्रेतायुग का आरम्भ।
                    b) पूर्णिमा - पीपल/ बुद्ध पूर्णिमा - इस दिन गोमती सागर मेला झालरापाटन, बाणगंगा मेला विराटनगर, मातृकुण्डिया मेला चित्तौड़गढ़, गौतमेश्वर मेला अरणोद प्रतापगढ़, नक्की झील मेला माउंट आबू।

3) ज्येष्ठ माह:-
कृष्ण पक्ष :- a) अमावस्या - वट सावित्री व्रत - स्त्री के अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति हेतु व्रत। बड़ या बरगद की पूजा की जाती है।
शुक्ल पक्ष :- a) दशमी - गंगा दशमी - गंगा जी का धरती पर अवतरण ।
                  b) एकादशी - निर्जला एकादशी -इसमें सूर्योदय से अगले दिन सूर्योदय तक जल ग्रहण नही करते। उदयपुर में पतंगे उड़ाई जाती है।
                 c)पूर्णिमा - पीपल पूर्णिमा
4) आषाढ़ माह :-
शुक्ल पक्ष - a) नवमी - भदल्या नवमी।
                 b) एकादशी - देव शयनी एकादशी - इस दिन भगवान विष्णु4 माह के लिए सो जाते हैं और इन 4 माह तक मांगलिक कार्य नही किये जाते।
                c) पूर्णिमा - गुरु पूर्णिमा - वेद व्यास जी के जन्मदिन के कारण व्यासपूर्णिमा भी कहते हैं। गुरु पूजन और गुरु भेंट का महत्व।

5) श्रावण माह :-
कृष्ण पक्ष :- a) पंचमी - नाग पंचमी
                 b) नवमी - निडरी नवमी - नेवले की पूजा की जाती है।
                c) अमावस्या - हरियाली अमावस्या - इस दिन कल्पव्रक्ष मेला मांगलियावास अजमेर, फतेह सागर मेला उदयपुर, बुढा जोहड़ मेला श्रीगंगानगर ।
शुक्ल पक्ष - a) तृतीया- छोटी तीज - पति की दीर्घायु हेतु व्रत । जयपुर में तीज माता की सवारी निकली जाती है। नवविवाहित लहरिया पहनती है और इनके  लिए ससुराल से सिंजारा भेजा जाता है।
                b) पूर्णिमा - रक्षा बंधन - नारियल पूर्णिमा भी कहते है। श्रवण कुमार की पूजा की जाती है। अमरनाथ में बर्फ का शिव लिंग बनता है।

               

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