मौर्य साम्राज्य के पतन के कारणों पर विचार कीजिए। अशोक उसके लिए कहाँ तक उतरदायी था ?

मौर्य साम्राज्य के पतन के कारणों पर विचार कीजिए। अशोक उसके लिए कहाँ तक उतरदायी था ?
Discuss the causes of the downfall of the Mauryan empire. How far Ashoka was responsible for it ?

(4) इ.घोष का मत : डा. नरेन्द्रनाथ घोष का कथन है कि “डाचौधरी का विचार पूर्णतः तथ्य पूर्ण नहीं है। अशोक के अभिलेखों में कहीं ऐसा संकेत नहीं मिलता, कि उसने सेना को तोड़ दिया लेकिन डा. घोष कहते हैं कि इस बात के प्रत्यक्ष प्रमाण कि सीमावर्ती जातियों की विद्रोही नीति के प्रति अशोक कड़ाई से पेश आया। वह इनको एक सीमा तक ही माफ कर सकता था। उसने जंगली जातियों को प्रत्यक्ष रूप से आगाह किया और कहा कि वह ऐसा कोई कार्य न करें जिससे उन्हें दण्ड का भागी होना पड़े अशोक की नीति संतुलित थी इस बात के प्रमाण हैं। अशोक जरूरत होने पर शक्ति का प्रयोग करने को तैयार रहता था । डा.चौधरी ने अपने तर्क में जैसा कहा कि अशोक ने भेरी घोष के स्थान पर धर्म घोष की घोषण की थी और अशोक मौर्य साम्राज्य के पतन के लिए उत्तरदायी रहा लेकिन डा.घोष कहते हैं कि इस घोषणा के बाद भी अशोक ने कलिंग को वापस नहीं लौटाया था। अहिंसावादी होते हुए भी उसने मृत्यु दण्ड को खत्म नहीं किया। वह आदर्शवादी के साथ ही साथ यथार्थवादी भी था । यदि उसने कलिंग के पश्चात धुर दक्षिणी व उत्तर सीमा प्रान्तीय राज्यों से युद्ध नहीं छेड़ा तो यह उसकी निर्बलता नहीं दूरदर्शिता और कूटनीति ही थी। | एक इतिहासकार ने प्रशासकों के अत्याचार को मौर्य साम्राज्य के पतन का कारण माना है। लेकिन नीलकंठ शास्त्री ने इन इतिहासकारों के तर्को का खण्डन किया।

(5) मौर्य साम्राज्य के पतन पर मजूमदार, राय चौधरी एवं दत्त के विचार – मौर्य साम्राज्य के पतन के बारे में प्रसिद्ध इतिहासकार मजूमदार, राय चौधरी एवं दत्त ने जो विचार व्यक्त किये वे निम्न प्रकार हैं।
इसमें कोई सन्देह नहीं कि उत्तरकालीन मौर्यों के शासन काल में साम्राज्य का क्रमवार पतन हुआ। कश्मीर के इतिहासकार कल्हण और संस्कृत नाटक मालविकाग्निमि के लेखक कालीदास ने यथाक्रम कश्मीर और सम्भवतः असर के स्वतंत्र होने का संकेत किया है। तीसरी शताब्दी ई.पू. के अन्त में काबल की घाटी सभागसेन नामक एक राजा के अधीन थी, जिसकी उपाधि भारतीयों का राजा’ बताती है कि उसके राज्य में शिशु की तराई भी शामिल थी। चूंकि उसका नाम उत्तरकालीन मौर्यों की किसी भी सूची में नहीं आता, इसलिए वह किसी परिवार का रहो होगा जो मौर्य साम्राज्य के भग्नावेश पर उत्तर पश्चिम में शक्तिशाली होगा। यदि वह मौर्य वंश से सम्बन्धित भी हो तो भी वह पाटलिपुत्र में शासन करने परिवार की प्रधान शाखा में नहीं रहा होगा।”
ग्रीक इतिहास वेत्ताओं की दी हुई उपाधि यह स्पष्ट करती है कि वह एक स्वतंत्र शासक था न कि तक्षशिला का केवल एक राज प्रतिनिधि। साम्राज्य के विघटन ने आक्रमणकारियों को निमंत्रित किया।” पोलीबिऊस का कहना है कि अन्तिओकस तृतीय महान 223-187 ई.पू. में जो अशोक के समकालीन अन्तिओकस द्वितीय, थिअस का पोता था और चन्द्रगुप्त मौर्य के समकालीन सेल्यूक्स प्रथम निकेटर के पौत्र का पौत्र था, भारत पर चढ़ आया और सुभागसेन से उसे बहुत हाथी मिले। यदि गार्गी संहिता का विश्वास किया जाय तो एक यवन सेना पाटलिपुत्र तक चढ़ आई थी।
| कुछ विख्यात इतिहासकारों ने मौर्य साम्राज्य के अन्त होने का कारण ब्राह्मणों से प्रोत्साहित प्रतिक्रिया को बताया है। जिनके विशेष अधिकारों को अशोक की नीति से नष्ट हुआ बताते हैं लेकिन अशोक के अभिलेखों में ऐसी कोई बात नहीं है जिससे यह स्पष्ट हो कि वह ब्राह्मणों को शत्रु था। मजूमदार, डा.चौधरी एवं दत्त के विचारानुसार मौर्य साम्राज्य के पतन का सच्चा कारण बहुत ही गम्भीर है। कलिंग के युद्ध के पश्चात अशोक ने अपने राज्याभिषेक के 8वें वर्ष में सैनिक विजय का त्याग किया और अपने उत्तराधिकारियों या वंशज को कोई भी आक्रमणकारी युद्ध न करने का आदेश दिया। इसके पश्चात जल्दी ही राजकीय आखेट भी बन्द कर दिया। शासन के अन्तिम वर्ष तक सेना अधिकतर निष्क्रिय थी जैसा कि सम्राट स्वयं ही बड़े गर्व से कहता है स्वयं ही धर्माचरण में लीन होने के कारण भेरी घोष अव धर्म घोष में दल गया।” | (6) मौर्य साम्राज्य के पतन पर डा.राजवली पाण्डेय के विचार – डा.पाण्डेय के विचारानुसार मौर्य साम्राज्य के पतन में कई कारण उनरदायी रहे। अशोक के शासन काल में मौर्य साम्राज्य अपनी सीमाओं का विस्तृत विस्तार कर चुका था। साम्राज्य की इस स्थिति को बरकरार रखने के लिए बहुत सजगता और शक्तिमान शासन की आवश्यकता थी । विगत मौर्य प्रशासकों में ऐसा कोई नहीं था जो इस तरह का शासन कर सकता। डा.पाण्डेय के अनुसार मौर्य साम्राज्य का पतन निम्न कारणों से हुआ।
| (1)सम्राट अशोक के पश्चात केन्द्रीयकरण की प्रतिक्रिया में राजनीति का प्रवाह विकेन्द्रीयकरण की ओर झुका । साम्राज्य के सीमान्तों में विद्रोही और स्वतंत्र राज्यों की स्थापना होने लगी। | (2) अशोक के दुर्बल उत्तराधिकारी अदूरदर्शी थे और वह न केवल विकेन्द्रीयकरण और विद्रोहों को रोकने में शक्तिहीन और असफल थे, लेकिन स्वयं उन्होंने इन प्रवृत्तियों को प्रोत्साहन दिया। उनमें से कई ने विद्रोह और स्वतंत्र राज्य स्थापित करके केन्द्रीय शासन को दुर्वल और शिथिल बना दिया।
(3) मौर्य साम्राज्य के पतन का तृतीय कारण था सैनिक दुर्बलता और विदेशी आक्रमण, अशोक की शान्तिवादी नीति ने मौर्य सेना को अनभ्यस्त, दुर्बल और जनता की सैनिक प्रवृत्ति को शिथिल कर दिया। जिन मध्य और पश्चिमी एशिया के यूनानियों को अशोक ने अपना मित्र और शान्तिवादी बनाने की कोशिश की वह अशोक के धर्मोपदेश से नहीं वरन उसकी राजनीतिक शक्ति से भयभीत रहे। उन्होंने यहाँ की केन्द्रीय सत्ता को कमजोर और यहाँ के राजनैतिक जीवन को छिन्न भिन्न पाते ही आक्रमण करना आरम्भ कर दिया।
(4) मनोवैज्ञानिक सूक्ष्म किन्तु अधिक गम्भीर स्थिति मौर्य साम्राज्य के पतन का कारण बनी और यह दशा मौर्य साम्राज्य के विरोध में वैदिक प्रतिक्रिया थी। सत्यता यह है। कि अशोक के पश्चात पशु वध निषेध के अलावा प्राचीन परम्परागत वैदिक धर्म में कोई दखल नहीं दिया। समस्त धार्मिक सम्प्रदायों को विश्वास और पूजा विधि की स्वतंत्रता थी । सरकारी नौकरियों में सभी वर्ण और धर्मवालों को स्थान दिया और स्वयं बौद्ध होते हुए भी श्रमणों से पहले ब्राह्मणों का आदर किया परन्तु इसमें कोई शंका नहीं कि उसकी सारी नीति परम्परागत भारतीय धर्म और राष्ट्रीयता के विरोध में थी । उसने सार्वभौमता, अन्तर्राष्ट्रीयता और मानववादिता के आदेश और आग्रह में राष्ट्रीय धर्म भावना और आचार की उपेक्षा ही नहीं की अपितु उस पर व्यंग्य और समय समय पर आलोचना भी की।

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